संदेश

शारीरिक फिटनेस के लिए 2 करोड़ से अधिक अमेरिकी करते हैं योग

चित्र
  शारीरिक फिटनेस के लिए 2 करोड़ से अधिक अमेरिकी करते हैं योग साइंस ने साबित किया, आधुनिक युग में प्राचीन भारतीय योग विद्या से शरीर और दिमाग को कई महत्वपूर्ण फायदे हैं  अमेरिका में योग की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है हॉलीवुड के सितारों से लेकर , नेशनल फुटबॉल लीग के खिलाड़ियों तथा अन्य सामान्य लोग तक शारीरिक फिटनेस और तनाव से मुक्त रहने  के लिए योग का सहारा लेने लगे हैं खास तौर से मजबूत मांसपेशियां बनाने और शारीरिक संतुलन कायम रखने के लिए तथा अपने शरीर को  चुस्ती फुर्ती और  लचीलेपन के लिए पुरुष योग करते हैं योग  मानसिक स्थिरता हासिल करने का एक कारगर साधन है|  इक्विनोक्स कंपनी की प्योर योग चेन के मैनेजर जेन ज्वेइबेल  कहते हैं|  पिछले वर्ष से हमारी कक्षाओं में पुरुषों की संख्या बढ़ी है कहीं क्लास में तो एक तिहाई पुरुष आते हैं | एक सर्वे के अनुसार योग करने वाले 2 करोड़ से अधिक अमेरिकी उनमें 18% पुरुष हैं |  कई वैज्ञानिक अध्ययनों से पता लगा है, योग से शरीर स्वस्थ रहता है | मानसिक परेशानियां दूर होती है | जिससे पुरुषों को औ...

सांस तो ले रहे हैं न!

चित्र
   सांस तो ले रहे हैं न! सांस लेने की प्रक्रिया स्वस्थ जीवन चक्र के लिए बहुत जरूरी है भागती दौड़ती जिंदगी में सभी दुख को भूलते जा रहे हैं सोच कर देखिए आपने आखरी बार कब अच्छी तरह से सांस लेती आश्चर्य की बात तो यह है कि विशुद्ध चिकित्सकीय निगाह से देखे तो ज्यादातर लोग बिना सांस लिए ही अपना जीवन जी रहे हैं शायद यह बात आपको थोड़ी अटपटी लग रही होगी, लेकिन यह सच है |  व्यस्त जीवन शैली के चलते हम सांस लेने में भी कंजूसी करने लगे हैं और खुद ही अपनी उम्र घटाते जा रहे हैं छोटी-छोटी सासे पूरे शरीर में प्राण वायु नहीं पहुंचाती, जो स्वास्थ्य को खराब करने का कारण बन जाती है | बार-बार जमाई आना भी इसी के कारण होता है कई बार ऐसा भी होता है|  कि आप लंबी सांस ले तो लेते हैं ,लेकिन छोड़ते समय फिर कंजूसी कर देते हैं | जरा आप  आपने सांस लेने के तरीके पर ध्यान दीजिए, आपको सब समझ में आ जाएगा | आजमाकर देखिए, जब कभी भी आप लंबी सांस लेंगे, तो रिलैक्स महसूस करेंगे क्योंकि वह लंबी सांस आपके अंदर से फेफड़े से लेकर ,दिल को और सभी अंगों तक प्रभावित करते हुए नाक  या मुंह के द्वार...

Bachcho ko mobile phone से होने वाले खतरों से कैसे बचाये

चित्र
  मोबाइल के जाल में कैद  बच्चों का भविष्य आज हम एक ऐसे यंत्र के विषय में बात  कर रहे हैं | जिसकी आवश्यकता आज रोटी,  कपड़ा और मकान की तरह हो गई है | आप ठीक समझें,  वह हैं मोबाइल | आप  इस यंत्र का दुनिया के किसी भी कोने में सरलता से प्रयोग कर सकते हैं ,एक- दूसरे से बातचीत करने के लिए | अगर  मोबाइल के लाभों पर दृष्टि डालें तो सकारात्मक रूप में विद्यार्थी वर्ग, उद्योगपति, ऑफिस कर्मचारी, शिक्षक वर्ग, विज्ञान से संबंधित और अन्य वर्ग अपने - अपने व्यवसाय हेतु इसके द्वारा अपने कार्यों और ज्ञान में वृद्धि करते हुए अपनी बात और लोगों से साझा करते हैं और आपातकालीन संदेश  गांव हो या शहर हो सभी स्थानों तक भेज सकते हैं|  पर कहते हैं ना की अति हर चीज की बुरी होती है  आज के वर्तमान समय  में मोबाइल की अधिकता उसका संपर्क इतना अधिक बढ़ता जा रहा है कि प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों पर इसका नकारात्मक प्रभाव अधिक पड़ रहा है जिसे हम आधुनिकता के नाम पर नकार रहे हैं मोबाइल फोन के हानिकारक प्रभाव मोबाइल फोन का विकिरण ( रेडिएशन )  मानव स्वास्थ्य और वातावर...

संघ क्या है (RSS)

चित्र
               संघ क्या है (RSS)         संघ क्या है और इसकी कार्य करने की पद्धतीय क्या है यह एक विशाल विषय है आइये एक लघु प्रसंग से जानने का प्रयास करते है यह उस समय की बात है जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक श्री बालासाहब देवरस ने अपने स्वास्थ्य कारणों से सरसंघचालक पद का त्याग कर, सरसंघचालक का दायित्व प्रो. रज्जू भैया को सौंप दिया था. इसी बीच उस समय के कम्युनिष्ट पत्रकार बिल्टिज साप्ताहिक के संम्पादक "रूसी करंजिया" "रज्जू भैया" से मिलने नागपुर पहुंचे. कुछ समय उनकी रज्जू भैया से चर्चा हुई. तभी भोजन की घंटी बज गई. रज्जू भैया ने रूसी करंजिया से कहा चलो पहले भोजन कर लेते हैं. भोजन कक्ष में बिछी हुई टाटपट्टी पर वे बैठ गए. कुछ अन्य लोग भी उनके साथ बैठ गए. अचानक "रूसी करंजिया" ने रज्जू भैया के बगल में बैठे व्यक्ति से उसका परिचय पूछ लिया.  उस व्यक्ति ने बताया कि - मैं माननीय रज्जू भैया का कार चालक हूँ. यह सुनते ही "रूसी करंजिया" चौक गए कि- इतने बड़े संगठन का मुखिया और उनका ड्राइवर एक साथ जमीन पर बैठकर एक जैसा भो...

सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति

चित्र
 सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति               भारत एक पंथ निरपेक्ष राष्ट्र है अधिकांश लोग इसे धर्मनिरपेक्ष कहते हैं | बकि  धर्मनिरपेक्ष तो कोई राष्ट्र, प्राणी या वस्तु हो ही नहीं सकता | धर्मनिरपेक्ष अर्थात धर्म विहीन तो हम हो ही नहीं सकते |  भारत की राष्ट्र शक्ति भारत के सभी संप्रदाय और पंथो  को निरपेक्ष दृष्टि से देखेगी, किसी के प्रति पक्षपात पूर्ण दृष्टि उसकी न होगी ,यही पंथ निरपेक्षता है |                सनातन धर्म एकमात्र धर्म है, जो संपूर्ण विश्व सृष्टि में समाया हुआ है | समय , परिस्थिति और स्थान  के अनुसार उसके जिस अंश को जिस कबीले या समुदाय ने महत्व दिया  वही उसका संप्रदाय या पंत बन गया |  ईश्वर एक है , इस धारणा को सभी मानते हैं |  जो नास्तिक कहते हैं कि हम ईश्वर को नहीं मानते | उनके नकार में भी ईश्वर का अस्तित्व तो विद्यमान है  ही | अतः सृष्टि संचालनकर्ता  कोई  अज्ञात शक्ति तो है ही जिसके रहने से सभी जीव सक्रिय है|        ...

‘चलो भाई चलो शाखा मे चलो’’ ( संघ गीत )

चित्र
  ‘‘चलो भाई चलो शाखा मे चलो’’ चलो भाई चलो..... शाखा मे चलो..... थोडी देर अब तुम सब काम भुलो चलो भाई चलो .....संग संग चलो.... आज के दिन ज़रा हंसो और खेलो ॥धु०॥ राम कृष्ण के वारिस हम गर्व से कहते हिन्दु हम भगवा ध्वज है पुज्य परम वन्दन उसे करो संग संग चलो ॥१॥ जीजा का मातृत्व हमे शौर्य लक्ष्मी का है तन मे मौसी जी कि आन हमे आगे बढो और संग संग चलो ॥२॥ छोटे छोटे बच्चे हम काम बडा करेंगे हम धर्म की रक्षा करेंगे हम कहेंगे वन्दे मातरम ॥३॥ शाखा में है रियल फन कबड्डि खो खो मे रम्ता मन करो योगा भुलो गम कदम मिलओ संग संग चलो ॥४॥ वीडियो देखने के लिए इस लिंक को क्लिक करे : https://youtu.be/4IcUgZAngz0

प्राणायाम किसे कहते हैउसे कैसे करना और क्या सावधानिया रखनी है और क्या लाभ है

चित्र
  प्राणायाम किसे कहते हैउसे कैसे करना और क्या सावधानिया रखनी है और क्या लाभ है  प्राणायाम = प्राण + आयाम इसका शाब्दिक अर्थ है प्राण (श्वसन) को लम्बा करना  या प्राण (जीवन शक्ति )को लम्बा करना (प्राणायाम का अर्थ श्वास को नियंत्रित करना या कम करना नहीं है )  यह प्राण शक्ति का प्रवाह कर व्यक्ति को जीवन  शक्ति प्रदान करता है