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माता सती और शक्तिपीठ

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माता सती  और शक्तिपीठ    अंत   में  –     दोस्तों   इस   आर्टिकल   में   मैंने   आपको   माता सती  और शक्तिपीठ के बारे में जानकारी प्राप्त कराया  अब   मुझे   उम्मीद   है   की   आपको   इस   आर्टिकल   को   पढ़ने   के   बाद   कोई   कन्फूज़न   नहीं   होगा ,  फिर   भी   अगर   आप   मुझसे   कोई   सवाल   करना   चाहते   हैं ,  तो   मुझे   कमेंट   में   बताईये    आर्टिकल   अच्छा   लगा   तो   अपने   मित्रो   के   साथ   भी   शेयर  करे |  धन्यवाद 

क्या पुनर्जन्म होता है ?

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  पुनर्जन्म एक सुनिश्चित सत्य पुनर्जन्म को लेकर लोगों  में सदा से ही कौतुक- कुतूहल रहा है | कुछ लोग इसे  चमत्कार मानते हैं, तो कुछ लोग इसे मिथ्या मानते हैं | विभिन्न शास्त्रों में पुनर्जन्म संबंधित अनेक आख्यान  वह प्रमाण है, जो यह प्रमाणित करते हैं कि पुनर्जन्म न तो कोई चमत्कार है, ना ही कोई अंधविश्वास | जो पैदा हुआ है उसकी मृत्यु निश्चित है, पर मृत्यु जीवात्मा के आगे की यात्रा का अंत नहीं है|  जीवन की अतृप्त वासनाओं कामनाएं , और कर्मफल ही  उसके जन्म व पुनर्जन्म के कारण है|  जब व्यक्ति की वासनाएं , कामनाएं, कर्मसंस्कार पूर्णत: नष्ट हो जाते हैं तभी जीवन -मरण वह पुनर्जन्म के चक्रव्यू से मुक्त हो पाता है|  हाँ  यह बात दीगर है कि किसी- किसी को अपने पुनर्जन्म की स्मृतियां नए जीवन में भी मानस पटल पर आती रहती है पर  सबकी अपने पुनर्जन्म की यादों का स्मरण हो जाए , यह आवश्यक भी नहीं है|  पुनर्जन्म की ऐसी अनेक घटनाएं अक्सर कहीं ना कहीं घटती हुई दिखाई पड़ती है, या सुनाई पड़ती है|  ऐसी ही एक घटना नासिक के 10 किलोमीटर उत्तर पूर्व के एक ...

ऐसे शुरू हुआ विक्रम संवत कैलेंडर

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  राजा विक्रमादित्य के नाम से भारत में विक्रम संवत के अनुसार अनुसार कैलेंडर की शुरुआत हुई सुप्रसिद्ध विद्वान आर्यभट्ट के अनुसार ईसा  से 3102 वर्ष पूर्व हमारे यहां कलियुगी  सवंत शुरू किया गया था ,जिसे आधुनिक अर्थ में विश्व का प्रथम कैलेंडर कहा जा सकता है |  प्राचीन भारत में कालचक्र को विभिन्न ऋतुओ  में बांटने की परंपरा थी |  सबसे छोटा खंड ' पल ' होता था |  इसके बाद दिन, माह, वर्ष ,दिव्य वर्ष, युग, महायुग मन्वंतर तथा कल्प आदि होते थे इसके लिए निश्चित और विस्तृत कालगणना थी |  सुप्रसिद्ध विद्वान आर्यभट्ट के अनुसार ईसा  310 2 वर्ष पूर्व हमारे यहां  कलियुगी  सवंत  शुरू किया गया था ,जिसे आधुनिक अर्थ में विश्व का प्रथम कैलेंडर कहा जा सकता है |  चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय के शिलालेखों में भी इसका उल्लेख मिलता है | इसके बाद ईसा से 57 वर्ष । पूर्व सम्राट विक्रमादित्य ने अपने नाम से नया कैलेंडर शुरू किया ,जिसे विक्रम - सवंत कहते हैं |  हमारे यहां जन साधारण में सर्वाधिक लोकप्रिय यही कैलेंडर है | हमारे उत्सव और पर्व आद...

सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति

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 सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति               भारत एक पंथ निरपेक्ष राष्ट्र है अधिकांश लोग इसे धर्मनिरपेक्ष कहते हैं | बकि  धर्मनिरपेक्ष तो कोई राष्ट्र, प्राणी या वस्तु हो ही नहीं सकता | धर्मनिरपेक्ष अर्थात धर्म विहीन तो हम हो ही नहीं सकते |  भारत की राष्ट्र शक्ति भारत के सभी संप्रदाय और पंथो  को निरपेक्ष दृष्टि से देखेगी, किसी के प्रति पक्षपात पूर्ण दृष्टि उसकी न होगी ,यही पंथ निरपेक्षता है |                सनातन धर्म एकमात्र धर्म है, जो संपूर्ण विश्व सृष्टि में समाया हुआ है | समय , परिस्थिति और स्थान  के अनुसार उसके जिस अंश को जिस कबीले या समुदाय ने महत्व दिया  वही उसका संप्रदाय या पंत बन गया |  ईश्वर एक है , इस धारणा को सभी मानते हैं |  जो नास्तिक कहते हैं कि हम ईश्वर को नहीं मानते | उनके नकार में भी ईश्वर का अस्तित्व तो विद्यमान है  ही | अतः सृष्टि संचालनकर्ता  कोई  अज्ञात शक्ति तो है ही जिसके रहने से सभी जीव सक्रिय है|        ...