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जून, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ऐसे शुरू हुआ विक्रम संवत कैलेंडर

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  राजा विक्रमादित्य के नाम से भारत में विक्रम संवत के अनुसार अनुसार कैलेंडर की शुरुआत हुई सुप्रसिद्ध विद्वान आर्यभट्ट के अनुसार ईसा  से 3102 वर्ष पूर्व हमारे यहां कलियुगी  सवंत शुरू किया गया था ,जिसे आधुनिक अर्थ में विश्व का प्रथम कैलेंडर कहा जा सकता है |  प्राचीन भारत में कालचक्र को विभिन्न ऋतुओ  में बांटने की परंपरा थी |  सबसे छोटा खंड ' पल ' होता था |  इसके बाद दिन, माह, वर्ष ,दिव्य वर्ष, युग, महायुग मन्वंतर तथा कल्प आदि होते थे इसके लिए निश्चित और विस्तृत कालगणना थी |  सुप्रसिद्ध विद्वान आर्यभट्ट के अनुसार ईसा  310 2 वर्ष पूर्व हमारे यहां  कलियुगी  सवंत  शुरू किया गया था ,जिसे आधुनिक अर्थ में विश्व का प्रथम कैलेंडर कहा जा सकता है |  चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय के शिलालेखों में भी इसका उल्लेख मिलता है | इसके बाद ईसा से 57 वर्ष । पूर्व सम्राट विक्रमादित्य ने अपने नाम से नया कैलेंडर शुरू किया ,जिसे विक्रम - सवंत कहते हैं |  हमारे यहां जन साधारण में सर्वाधिक लोकप्रिय यही कैलेंडर है | हमारे उत्सव और पर्व आद...

शारीरिक फिटनेस के लिए 2 करोड़ से अधिक अमेरिकी करते हैं योग

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  शारीरिक फिटनेस के लिए 2 करोड़ से अधिक अमेरिकी करते हैं योग साइंस ने साबित किया, आधुनिक युग में प्राचीन भारतीय योग विद्या से शरीर और दिमाग को कई महत्वपूर्ण फायदे हैं  अमेरिका में योग की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है हॉलीवुड के सितारों से लेकर , नेशनल फुटबॉल लीग के खिलाड़ियों तथा अन्य सामान्य लोग तक शारीरिक फिटनेस और तनाव से मुक्त रहने  के लिए योग का सहारा लेने लगे हैं खास तौर से मजबूत मांसपेशियां बनाने और शारीरिक संतुलन कायम रखने के लिए तथा अपने शरीर को  चुस्ती फुर्ती और  लचीलेपन के लिए पुरुष योग करते हैं योग  मानसिक स्थिरता हासिल करने का एक कारगर साधन है|  इक्विनोक्स कंपनी की प्योर योग चेन के मैनेजर जेन ज्वेइबेल  कहते हैं|  पिछले वर्ष से हमारी कक्षाओं में पुरुषों की संख्या बढ़ी है कहीं क्लास में तो एक तिहाई पुरुष आते हैं | एक सर्वे के अनुसार योग करने वाले 2 करोड़ से अधिक अमेरिकी उनमें 18% पुरुष हैं |  कई वैज्ञानिक अध्ययनों से पता लगा है, योग से शरीर स्वस्थ रहता है | मानसिक परेशानियां दूर होती है | जिससे पुरुषों को औ...

सांस तो ले रहे हैं न!

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   सांस तो ले रहे हैं न! सांस लेने की प्रक्रिया स्वस्थ जीवन चक्र के लिए बहुत जरूरी है भागती दौड़ती जिंदगी में सभी दुख को भूलते जा रहे हैं सोच कर देखिए आपने आखरी बार कब अच्छी तरह से सांस लेती आश्चर्य की बात तो यह है कि विशुद्ध चिकित्सकीय निगाह से देखे तो ज्यादातर लोग बिना सांस लिए ही अपना जीवन जी रहे हैं शायद यह बात आपको थोड़ी अटपटी लग रही होगी, लेकिन यह सच है |  व्यस्त जीवन शैली के चलते हम सांस लेने में भी कंजूसी करने लगे हैं और खुद ही अपनी उम्र घटाते जा रहे हैं छोटी-छोटी सासे पूरे शरीर में प्राण वायु नहीं पहुंचाती, जो स्वास्थ्य को खराब करने का कारण बन जाती है | बार-बार जमाई आना भी इसी के कारण होता है कई बार ऐसा भी होता है|  कि आप लंबी सांस ले तो लेते हैं ,लेकिन छोड़ते समय फिर कंजूसी कर देते हैं | जरा आप  आपने सांस लेने के तरीके पर ध्यान दीजिए, आपको सब समझ में आ जाएगा | आजमाकर देखिए, जब कभी भी आप लंबी सांस लेंगे, तो रिलैक्स महसूस करेंगे क्योंकि वह लंबी सांस आपके अंदर से फेफड़े से लेकर ,दिल को और सभी अंगों तक प्रभावित करते हुए नाक  या मुंह के द्वार...

Bachcho ko mobile phone से होने वाले खतरों से कैसे बचाये

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  मोबाइल के जाल में कैद  बच्चों का भविष्य आज हम एक ऐसे यंत्र के विषय में बात  कर रहे हैं | जिसकी आवश्यकता आज रोटी,  कपड़ा और मकान की तरह हो गई है | आप ठीक समझें,  वह हैं मोबाइल | आप  इस यंत्र का दुनिया के किसी भी कोने में सरलता से प्रयोग कर सकते हैं ,एक- दूसरे से बातचीत करने के लिए | अगर  मोबाइल के लाभों पर दृष्टि डालें तो सकारात्मक रूप में विद्यार्थी वर्ग, उद्योगपति, ऑफिस कर्मचारी, शिक्षक वर्ग, विज्ञान से संबंधित और अन्य वर्ग अपने - अपने व्यवसाय हेतु इसके द्वारा अपने कार्यों और ज्ञान में वृद्धि करते हुए अपनी बात और लोगों से साझा करते हैं और आपातकालीन संदेश  गांव हो या शहर हो सभी स्थानों तक भेज सकते हैं|  पर कहते हैं ना की अति हर चीज की बुरी होती है  आज के वर्तमान समय  में मोबाइल की अधिकता उसका संपर्क इतना अधिक बढ़ता जा रहा है कि प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों पर इसका नकारात्मक प्रभाव अधिक पड़ रहा है जिसे हम आधुनिकता के नाम पर नकार रहे हैं मोबाइल फोन के हानिकारक प्रभाव मोबाइल फोन का विकिरण ( रेडिएशन )  मानव स्वास्थ्य और वातावर...